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कोरोना मुक्त गांव और कोरोना मुक्त भारत अभियान का ख्याल मेरे मन में अप्रैल में आया था। उन्हीं दिनों यह समाचार मिलने शुरु हुए थे कि दूसरी लहर में कोरोना गांवों की तरफ भी रुख कर रहा है। पैथोलॉजी मेरी पी एच डी का विषय रहा है। मैं गांव में पला बढ़ा हूं और पिछले तीन दशक से मेरा गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में ग्राम विकास के रचनात्मक कार्यों से आत्मीय जुड़ाव रहा है, इसलिए मुझे महसूस हुआ कि कोरोना महामारी से गांवों को बचाने के लिए हमें काफी काम करने की जरूरत है , क्योंकि एक तो गांवों में जागरुकता का अभाव है और दूसरी तरफ स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं के बराबर हैं। गांवों में ज्यादा फैलने के बाद कोरोना को नियंत्रित करना बहुत मुश्किल होगा, इसलिए मैने अपने कई डॉक्टर मित्रों और गांवों में रचनात्मक कार्य करने वाली समाजसेवी संस्थाओं से गहन विचार विमर्श कर इस अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान की शुरुआत में एक दर्जन के आसपास संस्थाएं जुड़ी थीं जो विगत पंद्रह दिन में तीन दर्जन के आसपास हो गई हैं। इस अभियान में सबसे अधिक जोर देश भर में जागरुकता अभियान चलाकर गांवों में कोरोना के प्रसार को रोकने पर है, साथ ही हमें बीमारों के ईलाज की भी समुचित व्यवस्था करना है। हम चाहते हैं कि इस अभियान में समाजसेवी संस्थाएं,ग्राम पंचायत प्रतिनिधि और गांवों के युवा कार्यकर्ता सरकारी अमले के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करें तभी गांवों और देश में कोरोना पर शीघ्र नियंत्रण पाया जा सकता है। यह खुशी की बात है कि हमारे अभियान को सफ़लता मिल रही है और यह बारह प्रदेशों के हजारों गांवों में पहुंच गया है।

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गांव आज भी हमारे देश की रीढ़ हैं। गांधीजी तो यह कहते थे कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। यही कारण था कि गांधीजी की आत्मा भी भारत के गांवों में बसती थी। महामारी से गांवों को बचाना इसलिए भी जरूरी है कि लॉक डाउन के समय सबसे जरूरी तमाम चीज, अन्न, सब्जी, दाल, फ़ल और दूध आदि के स्रोत गांव ही हैं। आर्थिक तंगी में हम हर चीज में कटौती कर सकते हैं लेकिन भोजन में नहीं कर सकते। यदि कोरोना का कहर गांवों में भी शहरों की तरह बढता है तो हमारी भोजन श्रंखला ही गड़बड़ा जाएगी और गांवों में स्वास्थ सुविधाओं के नितांत अभाव में इसे नियंत्रित करना भी बहुत मुश्किल हो जाएगा। इसलिए हमें अधिक से अधिक गांवों को कोरोना मुक्त ग्राम बनाने की मुहिम चलानी चाहिए। इस मुहिम की सफ़लता के लिए निम्न 11  सूत्र कारगर होंगे..

  1. गांव के सरपंच, पंचायत सचिव और पंचायत सदस्यों को कोरोना से बचाव (preventive measures) , बीमारी हो जाने पर आर टी पी सी आर टेस्ट (korona test) कराने और गंभीर मरीज को नजदीकी कोविड केन्द्र(Designated Covid hospital) भेजने के बारे में जरुरी जानकारी से लिखित रूप में अवगत कराना होगा, जिससे वे अपनी जिम्मेदारी ठीक से समझ सकें और जरूरत पड़ने पर अपनी जिम्मेदारी का ठीक से निर्वहन भी कर सकें।
  2. सभी ग्राम वासियों को मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और कई बार साबुन से हाथ धोने और खांसी बुखार की शुरुआत में ही भाप लेना, गरम पानी के गरारे करने और मरीज को घर के बाकी  सदस्यों से अलग करने आदि की सामान्य जागरूकता की जानकारी देना।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, प्राइमरी स्कूल के शिक्षक और धार्मिक गुरु, मसलन मंदिर के पुजारी और मस्जिद के मौलवी आदि बच्चों और महिलाओं के माध्यम से यह कार्य आसानी से कर सकते हैं।

  1. धूम्रपान के नुकसान की जानकारी देना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि कमजोर फेफड़े वालों को यह बीमारी जल्दी पकड़ती है।
  2. खानपान में सादा पौष्टिक आहार और अधिक pH के फल नींबू, आम और अनानास आदि के उपयोग की सलाह देना।
  3. गांव के बाहर कम से कम निकलने की सलाह और साप्ताहिक हाट बाजार की भीड और वहां के भोजन से बचना।
  4. शहर से लौटे मजदूरों या पढ़ाई करने वाले बच्चों को कुछ दिन के लिए घर के बाहर खाली पड़ी जगह, मसलन, पंचायत भवन, स्कूल या खेत आदि पर रुकने की व्यवस्था करना।
  5. बुजुर्गों को बीमारी से बचाने के लिए उनसे कम भौतिक  संपर्क करना।
  6. शादी, भजन कीर्तन और मृत्यु भोज आदि में कम से कम लोगों को जोड़ना।
  7. शाम के नृत्य गायन कार्यक्रमों (आदिवासी समूह नृत्य और घोटुल के रात्रि आयोजन) को इस दौरान स्थगित करना क्योंकि उसमें अधिकांश लोग शराब पीकर तेज आवाज में लड़ते झगड़ते हैं।
  8. कोरोना के बारे में ओझाओं और नीम हकीमों के अंध विश्वास और उलजुलुल दवा आदि से परहेज करना और प्राधिकृत डॉक्टर्स के द्वारा बताई गई दवाई का इस्तेमाल करना।
  9. अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए तैयार करना।

     यह अभियान दिनोदिन तेज गति पकड़ रहा है। वर्तमान में इस अभियान में शिरकत करने वाली दस प्रदेशों की लगभग दो दर्जन से ज्यादा समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि अपने अपने क्षेत्र में ग्यारह सूत्रीय कार्यक्रम के प्रचार प्रसार में जीजान से जुटे हैं और अधिक से अधिक गांवों तक पहुंच कर ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण आबादी को कोरोना महामारी से बचाव के लिए जागरूक कर रहे हैं और बीमार लोगों की यथा सम्भव मदद कर रहे हैं। इस आभियान से जुड़े कई डॉक्टर्स टेलीफोन के माध्यम से बीमार लोगों को निशुल्क मेडिकल सलाह प्रदान कर रहे हैं।

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यह हमारी कोरोना मुक्त गांव अभियान का सूत्रीय कार्यक्रम है, जिसे कई भाषाओं में अनुवादित किया गया है ताकि स्थानीय ग्रामीण आसानी से समझ सकते हैं।

कोरोना मुक्त गांव/ कोरोना मुक्त भारत मिशन का थीम गीत :
– आर के पालीवाल

घर से बाहर तब ही निकलें गर मजबूरी है
कोरोना  से  बचने  को  मास्क  जरूरी  है

पास पास बैठोगे भैया पकड़ेगा कोरोना
कोरोना नहीं आएगा गर दो गज दूरी है

घर से बाहर तब ही निकलें गर मजबूरी है
कोरोना  से  बचने  को  मास्क  जरूरी  है

हमने जगह जगह रखे हैं साबुन सेनेटाइजर
कोरोना   से   बचने  की   तैयारी   पूरी   है

घर से बाहर तब ही निकलें गर मजबूरी है
कोरोना  से  बचने  को  मास्क  जरूरी  है

कोरोना  गर  आसपास है मास्क बचाएगा
याद रहे घर से निकलें तो मास्क जरूरी है

घर से बाहर तब ही निकलें गर मजबूरी है
कोरोना  से  बचने  को  मास्क  जरूरी  है

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